तुम थीं और नहीं भी

भीड़ थी, और मैं इज़्तिरार भी खानाबदोश मेरी नज़रें जब मिली तुमसे तुम नज़ाकत से शर्मायी थीं और नहीं भी रास्ते थे, और हम गुमशुदा भी चंद खूबसूरत लम्हों के लिए आशना थे हम तुम कुछ करीब आयी थीं और नहीं भी जुस्तजू थी, और मैं सिफर भी कुछ पहचाने से पर बिखरे हुए लफ़ज़ों […]

Home, for Tonight

The bar is dimly lit, a dirty shadow of yellow.It turns your shirt an absurd red,weird looks beautiful on you.Another glass of JD and coke, and you ask why the air in bars is a bit too heavy. Sad people, searching homes, pouring whiskeysinside and smoking the fumes of remorse out, probably, I say.Bullshit, you […]

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